2017 में सुप्रीम कोर्ट ने कमिटी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेटर्स (CoA) के हाथों में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सौंप दिया. उनकी ओर से कई टिप्पणियां और सुझाव आये. समय बीतता गया और सुधार की बाट जोह रही आंखों ने CoA को बिखरते और फिर टाइम-पास में तब्दील होते देखा. होते-करते इस कमिटी को झाड़-पोछकर किनारे रख दिया गया और टीम सौरव गांगुली ने बीसीसीआई की चाभी अपनी अंटी में बांध ली. 2019 आते-आते, भारतीय क्रिकेट की सत्ता का हस्तांतरण होते-होवाते, भारतीय क्रिकेट प्रशासन की ख़ामियों की बातें दबती गयीं. 2019 के बाद ऐसी बातें होनी ही बंद हो गयीं. भारतीय क्रिकेट, सनद रहे कि इसमें आईपीएल भी शामिल है, निहायती प्योर ऐंड पायस मालूम होने लगा. हालिया वाकयों में, 21 अगस्त 2022 को मध्य प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन के पूर्व सदस्य संजीव गुप्ता ने बीसीसीआई से जुड़े लोगों के ख़िलाफ़ दायर अपनी सभी 21 शिकायतों को वापस ले लिया. उन्होंने इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि अपनी सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वो ये कदम उठा रहे थे. संजीव गुप्ता की शिकायतों के बाद बीसीसीआई ने नीता अम्बानी से जो जवाब मांगे थे, उनके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आयी है.

विकास के क्रम में आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी और महंगी क्रिकेट लीग बन गयी. प्रति मैच के मामले में ये दुनिया का दूसरा सबसे महंगा टूर्नामेंट बन गया. इसने एक काम और किया – दुनिया भर में और भी छोटी-छोटी क्रिकेट लीग्स को जन्म दिया. इन क्रिकेट लीग्स में एक आयी – रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़. इस सीरीज़ में दुनिया भर के दिग्गज रिटायर्ड खिलाड़ी खेलते हैं. भारतीय जड़ों वाली इस लीग को सड़क पर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के ध्येय के साथ शुरू किया गया था. इस लीग को भारतीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है. लेकिन इस लीग का कर्ता-धर्ता कौन है? इसका जवाब मज़ेदार है. इसका आईपीएल, सचिन तेंदुलकर, कांग्रेस आदि से भी कनेक्शन है. और इस सब के पीछे है महाराष्ट्र के सोलापुर का गायकवाड परिवार. 

Advertisement
रवि गायकवाड

मई 2021 में ऑस्ट्रेलियन प्लेयर ब्रैड हॉग ने ट्वीट करके कहा कि कोच्चि टस्कर्स टीम से आईपीएल में खेलने वाले खिलाड़ियों को तय रक़म का 35% हिस्सा मिलना बाक़ी था. उन्होंने बीसीसीआई से गुहार लगायी कि उस पैसे की कोई खोज-ख़बर ली जाए. 2022 में रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ के बारे में भी यही सुनने को मिला कि इसके खिलाड़ियों को पूरे पैसे नहीं दिए गए थे. ख़बर ये भी थी कि सचिन तेंदुलकर को भी पूरा पेमेंट नहीं मिला था. इसके साथ ही बांग्लादेशी खिलाड़ियों के भी नॉन-पेमेंट की वजह से बिदके होने की बात सामने आयी थी. हालांकि लीग की तरफ़ से सफ़ाई आयी कि नॉन-पेमेंट की सभी ख़बरें आधारहीन थीं और खिलाड़ियों को कैसी भी, कोई भी समस्या नहीं थी.

इन दोनों इकाईयों, कोच्चि टस्कर्स और रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ के पीछे गायकवाड भाई खड़े दिखते हैं. शैलेन्द्र गायकवाड और रवि गायकवाड.

महाराष्ट्र के सोलापुर ज़िले में किशनराव गायकवाड सिंचाई विभाग में डिप्टी एग्ज़ेक्यूटिव इंजीनियर के पद से रिटायर हुए. उनकी पत्नी पुष्पा गृहणी थीं. किशनराव और पुष्पा गायकवाड की तीन संतानें थीं – शैलेन्द्र, रवीन्द्र और प्रतिभा. प्रतिभा यूनाइटेड किंगडम में स्त्री-रोग विशेषज्ञ (gynaecologist) हैं. 

Advertisement

शैलेन्द्र गायकवाड

शैलेन्द्र गायकवाड को सोलापुर में लोग प्रदीप के नाम से जानते हैं. उन्होंने उस्मानाबाद में इलेक्ट्रिकल ब्रांच से इंजीनियरिंग पूरी की और फिर कई उद्यमों में हाथ आज़माए. पुष्पा ऑटोमोटिव्स इसमें से एक था. ये महिंद्रा की गाड़ियों की डीलरशिप का काम था. कोच्चि टस्कर्स में शैलेन्द्र का नाम सामने आने के बाद सोलापुर में उनके भव्य बंगले पर जब पत्रकारों की भीड़ पहुंची तो वहां प्रतिभा ने सभी से बात की और बताया कि शैलेन्द्र ने पुष्पा ऑटोमोटिव्स को कई साल पहले बेच दिया था. मालूम ये भी चला कि शैलेन्द्र ने कन्नडा फ़िल्मों में भी हाथ आजमाया था. कई जगहों पर ऐसा कहा गया कि दिग्गज डायरेक्टर प्रियदर्शन की हिंदी फ़िल्म मालामाल वीकली के कन्नडा रीमेक में शैलेन्द्र ने ऐक्टिंग की थी और इस फ़िल्म का निर्देशन भी उन्होंने किया.

शैलेन्द्र गायकवाड और ललित मोदी (फाइल फोटो)

हालांकि इंटरनेट पर कई जगह ढूंढने पर मालूम चला कि मालामाल वीकली को जब कन्नडा में बनाया गया, तो उसे नाम मिला ‘डकोटा पिक्चर’. और इसका निर्देशन एन ओमप्रकाश राव ने किया था. खैर, शैलेन्द्र गायकवाड ने इसके अलावा सोलापुर में पुष्पा क्रिकेट एकेडमी भी शुरू की. कुछ ही समय में वहां सोलापुर प्रीमियर लीग भी शुरू हो गयी जिसमें शैलेन्द्र की अपनी टीम भी हिस्सा लेती थी. सोलापुर प्रीमियर लीग 2009 में शुरू हुई थी और इसका आयोजन कांग्रेस के बड़े नेता सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणीति शिंदे ने स्थानीय कांग्रेस नेताओं के साथ मिलकर किया था. सोलापुर प्रीमियर लीग में टीम उतारने के 2 साल बाद शैलेन्द्र गायकवाड रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड के नाम के साथ इंडियन प्रीमियर लीग में अपनी एक टीम की जगह पक्की करवा चुके थे. 

Advertisement

रवीन्द्र/रवि गायकवाड
रवीन्द्र गायकवाड ने वालचंद कॉलेज से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री हासिल की. इसके बाद वो आगे चलकर रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफ़िसर बन गए. हालांकि ये उनकी पहली पसंद नहीं थी. असल में रवीन्द्र यूपीएससी क्लियर करना चाहते थे. लेकिन असफल रहने के बाद उन्होंने दूसरी राह पकड़ी और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफ़िसर बन गए. यहीं एक ऐसी घटना घटी जिसके चलते भारत सरकार को फ़रवरी 2003 में कस्टम्स ऐक्ट में बदलाव करने पड़े थे. सचिन तेंदुलकर को डॉन ब्रैडमैन के रिकॉर्ड की बराबरी करने पर जुलाई 2002 में फ़िएट की ओर से जो फ़रारी उपहार में मिली थी, उसकी कस्टम ड्यूटी माफ़ करने वाले ट्रांसपोर्ट ऑफ़िसर रवीन्द्र गायकवाड ही थे. बाद में, जब ये मामला सामने आया तो सरकार ने अधिकारिक रूप से ये घोषणा की कि उन्होंने एक करोड़ से ऊपर की ड्यूटी की छूट सचिन को दे दी थी. आगे चलकर, फ़रवरी 2003 में फ़ाइनेंशियल बिल के साथ कस्टम्स ऐक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखा जिसे मंज़ूरी भी मिल गयी.

रवि गायकवाड

रवीन्द्र गायकवाड की हाई-प्रोफ़ाइल शख्सियतों से नज़दीकियां शुरू हो चुकी थीं. माना जाता है कि इसी दौरान उनकी कई ऐसे बड़े लोगों से दोस्ती हुई जो इम्पोर्टेड गाड़ियों का शौक रखते थे. इसके बाद रवीन्द्र पर एक बड़ा आरोप लगा. जिस वक़्त वो अंधेरी डिवीज़न में डिप्टी आरटीओ थे, उनका नाम महंगी इम्पोर्टेड बाइकों की ड्यूटी छोड़ने के घोटाले में आया. उनके अलावा 17 और अफ़सरों का नाम शामिल थे. एक ओर जांच शुरू हुई और दूसरी तरफ़ 18 में 11 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया और इस घोटाले में छोटा रोल निभाने वाले बचे 7 लोगों को ट्रांसफ़र लेटर थमा दिया गया. रवीन्द्र गायकवाड को मराठवाड़ा ज़िले के बीड में ट्रांसफ़र किया गया. लेकिन उन्होंने ड्यूटी नहीं जॉइन की और छुट्टी पर चले गए. 12 साल बाद, 2010 में रवीन्द्र गायकवाड को जांच में निर्दोष पाया गया. हालांकि उनपर ड्यूटी पर न आने का चार्ज लगाया गया.

इन दोनों भाइयों की पहुंच और ओहदे का आलम ये था कि सोलापुर में 2005 में बहन प्रतिभा की शादी में सचिन तेंदुलकर और दिलीप वेंगसरकर मौजूद थे. इससे भी पहले, जब पुष्प ऑटोमोटिव्स का उद्घाटन हुआ था, तो ये सुनील गावस्कर के हाथों हुआ. उस मौके पर ज़हीर ख़ान और नयन मोंगिया भी मौजूद थे. 

Advertisement

क्रिकेट की लीग्स में कैसे हुई एंट्री
उस्मानाबाद में, कॉलेज के दिनों में शैलेन्द्र गायकवाड की मुलाक़ात जयंत कोटलवार से हुई. दोनों दोस्त बन गए और भविष्य के बारे में प्लानिंग करने लगे. कुछ बड़ा करना, इनके प्लान की थीम थी. 1998 में जयंत कोटलवार अमरीका चले गये जहां उन्होंने कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की नौकरियां कीं और आने वाले समय में कई स्टार्ट-अप्स की नींव रखी. जयंत और शैलेन्द्र की दोस्ती चलती रही और शैलेन्द्र के दिमाग में क्रिकेट फ़्रेंचाईज़ी का आईडिया हमेशा से रहा. आईपीएल की शुरुआत होते ही उन्होंने जयंत से अपना आईडिया शेयर किया और इसपर काम शुरू हो गया. जयंत ने कई इन्वेस्टर्स से बात की लेकिन सफलता हाथ नहीं लग रही थी. एक तरफ़ जयंत कोटलवार और शैलेन्द्र गायकवाड दोस्त थे, वहीं उनसे भी पहले इन दोनों के बड़े भाई हेमंत कोटलवार और रवीन्द्र गायकवाड दोस्त बने चुके थे. हेमंत और रवीन्द्र की मुलाकात 90 के दशक में सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करते हुए हुई. आज हेमंत कोटलवार चेक गणराज्य में भारत के राजदूत हैं और जयंत कोटलवार कोच्चि टस्कर्स केरला में 1.6% के हिस्सेदार हुआ करते थे.

कोच्चि टस्कर्स केरला को लेकर जो जांच हुईं, उससे ये समझ में आया कि कोच्चि की टीम के लिये जो भी आपसी व्यवस्था बनायी गयी, उसके पीछे रवीन्द्र और शैलेन्द्र का ही दिमाग था. लम्बे वक़्त से खेलों की दुनिया पर नज़र बनाये हुए और आईपीएल की मैदान से इतर कहानियों को केंद्र बनाकर ‘दी आईपीएल स्टोरी- क्रिकेट ग्लैमर ऐंड बिग मनी’ किताब लिख चुके पत्रकार अभिषेक दुबे अपनी किताब में लिखते हैं कि रवीन्द्र ने ही रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड की कल्पना की जिसके गठन के बाद आईपीएल फ़्रेंचाईज़ी के लिये बोली लगायी गयी. रॉन्देवू नाम की भी मज़ेदार कहानी है. शैलेन्द्र गायकवाड सिमी गरेवाल के फ़ैन थे और उनके टीवी शो ‘रॉन्देवू विद सिमी गरेवाल’ से प्रेरित होकर ही इस कम्पनी का नाम रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड रखा गया. रवीन्द्र कभी भी, किसी भी रूप में सामने नहीं आये और शैलेन्द्र ही इसका चेहरा बने रहे.

रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड ने सुनंदा पुष्कर को साथ लिया. सुनंदा के ही शब्दों में, उन्हें फ़ंड जुगाड़ने, नेटवर्किंग, इवेंट मैनेजमेंट और ब्रांड बिल्डिंग के लिये बुलाया गया था. कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक़ सुनंदा पुष्कर बतौर कंसल्टेंट रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड के साथ जुड़ी थीं. बाद में ये भी मालूम पड़ा कि सुनंदा का रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड में 18% हिस्सा था, जो कोच्चि की टीम का कुल 4.5% हिस्सा था. आगे चलकर कोच्चि टस्कर्स केरला के मामले ने जब राजनीतिक ऐंगल लेना शुरू किया तो रायता समेटने के लिये एक राजनीतिक चेहरे को साथ जोड़ा गया. ये चेहरा भी गायकवाड परिवार से ही आया – सत्यजीत गायकवाड. सत्यजीत गायकवाड वडोदरा से पूर्व सांसद थे और गुजरात कांग्रेस का एक बड़ा नाम थे.

Advertisement

सत्यजीत गायकवाड गुजरात के लिये रणजी ट्रॉफ़ी खेल चुके थे और किरण मोरे, रवि शास्त्री के साथी थे. सत्यजीत गायकवाड कोच्चि टस्कर्स केरला के प्रवक्ता बने और फ़्रेंचाईज़ी के हिस्सेदारों पर सवाल उठाये जाने पर उन्होंने तस्वीर को साफ़ करना शुरू किया. उन्होंने ही ये साफ़ किया कि चूंकि सुनंदा पुष्कर को वो फ़ीस नहीं दे सकते थे, इसलिये उन्हें टीम में हिस्सेदारी दे दी गयी थी. उन्होंने ललित मोदी पर ये आरोप भी लगाया कि मोदी ने 50 मिलियन डॉलर के बदले में रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड को कोच्चि की टीम छोड़ देने को कहा था. ललित मोदी ने इस बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया था कि जब वो बोली लगाने वालों में से थे ही नहीं तो आखिर क्यूं किसी से टीम छोड़ देने को कहेंगे.

कोच्चि टस्कर्स केरला में शैलेन्द्र के अलावा उनके माता-पिता की भी हिस्सेदारी थी. ये टीम का 19.85% था जिसकी कीमत लगभग 292 करोड़ रूपये थी. जयंत कोटलवार के पास रॉन्देवू का 1.6% हिस्सा था जो लगभग 5.8 करोड़ रुपये था. 

ये पैसा आया कहां से?

Advertisement

तो ले-देकर मुद्दा इस बात पर आता है कि आख़िर साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले गायकवाड परिवार और कोटलवार ने इतना पैसा कहां से जुटाया कि वो 1,533 करोड़ की टीम के मालिक बन बैठे? इसका जवाब मिलता है जांच एजेंसियों द्वारा पैसों के आवागमन की जांच होने पर मिलने वाले नतीजों से. केरला राज्य के नाम पर बनी टीम में विवेक वेणुगोपाल एकमात्र इन्वेस्टर थे जो केरला से थे और उनकी आईपीएल की फ़्रेंचईज़ी में 1% की हिस्सेदारी थी. इसके अलावा बिजली के उपकरण और साजो-सामान बनाने वाली कम्पनी ऐंकर अर्थ (27% हिस्सा), फ़िल्म वेव्स (12% हिस्सा), पाणिनि डेवेलपर्स (26% हिस्सा) आनंद शाह स्टेट्स (8% हिस्सा) शामिल थे. वेणुगोपाल के अलावा ये सभी हिस्सेदार या तो दुबई में आधारित थे या फिर उनका वहां बिज़नेस चल रहा था. इसके अलावा सुनंदा पुष्कर(18% हिस्सा) दुबई में लम्बे वक़्त तक रह चुकी थीं. साथ ही टीम के साथ आग जुड़ने वाले शशि थरूर भी 2009 में चुनाव लड़ने से पहले दुबई के एफ़्रास वेंचर्स के चेयरमैन रह चुके थे. जिस मौके पर बोलियां लगने के बाद कोच्चि की टीम का नाम फ़ाइनल हुआ, वहां ललित मोदी के सामने सिर्फ़ 1% हिस्सेदारी वाले विवेक वेणुगोपाल ही मौजूद थे. 

ललित मोदी (फोटो: Getty)

फ़िल्म वेव्स असल में दुबई आधारित बिज़नेसमैन हर्षद मेहता द्वारा सपोर्ट की गयी कम्पनी है. हर्षद मेहता रोज़ी डायमंड ग्रुप के मालिक थे. कोच्चि टस्कर्स केरला के मालिकाना हिस्सेदारों को लेकर उठे सवालों के बाद शैलेन्द्र गायकवाड ने रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड के सीईओ के पद से इस्तीफ़ा दे दिया और उनकी जगह ली केशव टी ने. केशव टी हर्षद मेहता की कम्पनी रोज़ी डायमंड ग्रुप से ही जुड़े हुए थे. इसके अलावा हर्षद मेहता को कोच्चि फ्रेंचाईज़ी का चेयरमैन बना दिया गया. आगे चलकर हर्षद मेहता का नाम स्विस लीक्स, पनामा पेपर्स और पैराडाइस पेपर्स में आया.

गायकवाड परिवार के निवेश के बारे में बताया गया कि असल में इस परिवार के किसी भी सदस्य ने एक भी रुपये का निवेश नहीं किया था. शैलेन्द्र और रवीन्द्र की बहन डॉक्टर प्रतिभा पाटिल द्वारा जारी की गयी रिलीज़ में ये साफ़ किया गया कि मैनेजमेंट, प्रशासन और मार्केटिंग के ऐवज में रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड को कोच्चि टीम में हिस्सेदारी मिली थी. गायकवाड परिवार द्वारा बतायी गयी कहानी के अनुसार शैलेन्द्र और रवीन्द्र के आपसी सम्बन्ध बहुत अच्छे नहीं थे और आईपीएल टीम को लेकर जो भी काम हो रहा था, शैलेन्द्र ही कर रहा था. जबकि इस बात को तब शक की निगाहों से देखा गया जब ये मालूम पड़ा कि आईपीएल को दिये अपने पते में शैलन्द्र गायकवाड ने अपने भाई और आरटीओ रवीन्द्र गायकवाड के सरकारी घर का पता लिखकर दिया हुआ था.

Advertisement

रवीन्द्र गायकवाड की रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़

रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ की शुरुआत सड़क पर सावधानी बरतने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के मकसद से किया गया. इसे भारत के परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है. लेकिन इस टूर्नामेंट की टीमों का मालिक कौन है, इस सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं दिख रहा है. रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ की वेबसाइट पर लीग के मालिकों, आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स समेत और विषयों वाले हिस्से में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है. 

हालांकि 10 सितम्बर को, रोड सेफ़्टी सीरीज़ का दूसरा संस्करण शुरू होने वाले दिन, इंटरनेट पर छपे कुछ आर्टिकल्स की बदौलत इस लीग के दूसरे संस्करण की 2 टीमों के मालिकों के बारे में कुछ जानकारी मिल सकी. इन आर्टिकल्स के अनुसार इंडियन लेजेंड्स की मलिक हैं मॉडल और बिज़नेसपर्सन निकी दास और साउथ अफ़्रीका लेजेंड्स के मालिक हैं मुंबई आधारित बिज़नेसपर्सन क्रांति शानभाग.

रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ के मुख्य प्रमोटर हैं रवि गायकवाड. रवि ठाणे (कोंकण रेंज) के आरटीओ चीफ़ हैं. सचिन तेंदुलकर रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ के ब्रांड एम्बेसडर हैं. इसके अलावा सुनील गावस्कर भी इस लीग से जुड़े हुए हैं. सुनील गावस्कर को इस लीग का कनिश्नर नियुक्त किया गया था. सुनील गास्वकर की कम्पनी प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट ग्रुप इस सीरीज़ का सारा ऑन ग्राउंड ऑपरेशन, को-ऑर्डिनेशन, प्लेयर मैनेजमेंट, स्पॉन्सरशिप और सेल्स का काम देखती है. इन्हीं सुनील गावस्कर का नाम आईपीएल के वक़्त कोच्चि टस्कर्स केरला के सन्दर्भ में हितों के टकराव के मामले में आया था. सुनील गावस्कर आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य थे. इसी दौरान रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड ने ये जानकारी दी थी कि सुनील गावस्कर ने उन्हें टीम की बोली लगाने और उसे जुड़े और भी कामों में ख़ासी मदद की थी. हालांकि सत्यजीत गायकवाड ने ये भी बताया था कि उनकी फ़्रेंचाइज़ी में कोई हिस्सेदारी नहीं थी.

Advertisement

रोड सेफ़्टी वर्ल्ड सीरीज़ और कोच्चि टस्कर्स केरला से जुड़ी जानकारी पाने के लिये हमने रवि गायकवाड से संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन उनकी ओर से हमें कोई जवाब नहीं मिल सका. आने वाले समय में यदि इससे वो लीग और इससे जुड़ी टीमों के मालिकाना पक्ष और कोच्चि टस्कर्स केरला और रॉन्देवू स्पोर्ट्स वर्ल्ड से अपने संबंधों के बारे में अपना पक्ष रखते हैं तो उनकी बातों को ज़रूर जगह दी जायेगी. 

 

Advertisement